
आजादी की मांग कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी फौज ने अंधाधुंध फायरिंग की, सड़कों पर लाशें ही लाशें बिछी हुई दिखाई दीं। आप तस्वीरें देखेंगे तो कलेजा मुंह को आ जाएगा। आसिम मुनीर की फौज ने PoK की पुलिस को भी नहीं बख्शा। कई पुलिस वालों को भी गोलियों से उड़ा दिया। फौज को शक है कि पुलिस के जवान PoK की आवाम का साथ दे रहे हैं। हालांकि फौज की गोलियां, लाशों के ढेर, खून की नदियां PoK की जनता को डरा नहीं पाईं। उल्टा हुआ, विरोध की चिंगारी शोलों में बदल गईं।
घबराकर शहबाज शरीफ ने प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए एक टीम को मुजफ्फराबाद भेजा लेकिन इंकलाब के नारे लगाने वाले अब इंतकाम चाहते हैं। वो पाकिस्तान की हुकूमत से बात नहीं करना चाहते, आजादी चाहते हैं।
मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी
पाकिस्तानी फौज की हैवानियत दुनिया के सामने न आए, PoK में लगी आग और ज्यादा न भड़के, इसलिए पाकिस्तान सरकार ने PoK में इंटरनेट बैन कर दिया और मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगा दी है। लोगों का कहना है कि वो पिछले 78 बरस से पाकिस्तान के ज़ुल्म झेल रहे हैं लेकिन अब इंतहा हो गई। अब शहबाज शरीफ की हुकूमत और मुनीर की फौज को अपने गुनाहों का हिसाब देना होगा।
वैसे तो पाकिस्तान के मीडिया ने PoK के ख़ून-खराबे को सेंसर कर दिया है लेकिन वहां के कुछ आजाद पत्रकार PoK की खबरें बाकी दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे ही एक पत्रकार इमरान रियाज ने बताया कि PoK में रेंजर्स और पुलिस की फायरिंग में बड़ी तादाद में लोग मारे गए हैं लेकिन शहबाज सरकार और मुनीर की फौज ये आंकड़ा छुपा रही है। PoK की जनता अब पाकिस्तान से निजात पाने पर एलान कर चुकी है। निहत्थे लोगों पर फायरिंग के बाद भड़के हुए लोग पाकिस्तान की पुलिस पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। कोटली, मीरपुर, और ददियाल में पब्लिक ने पुलिस की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
PoK में लोकल मीडिया के लोगों ने जान पर खेलकर फौजी हैवानियत की तस्वीरें भेजी हैं। पाकिस्तान के मेनस्ट्रीम मीडिया से दिल दहलाने वाली ये तस्वीरें गायब हैं। PoK के लोग पूछ रहे हैं कि कहां हैं वो लोग जो मोमबत्तियां जलाते थे? कहां हैं वो लोग जो इंसानियत के पैरोकार बनते थे? वेस्टर्न मीडिया को ये खून से सनी लाशें दिखाई क्यों नहीं देतीं? मुझे लगता है कि PoK की आवाज को अब ज्यादा दिन दबाया नहीं जा सकेगा। बहुत जल्द शहबाज और मुनीर के जुल्म की तस्वीरें पूरी दुनिया देखेगी।
