
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी की हद कर दी. तारीफ के ऐसे पुलिंदे बांधे कि ऐसी तारीफ सुनने को हमेशा उत्सुक रहने वाले ट्रंप फूले न समाए होंगे. और तरीफ भी इस्लामाबाद के अपने ऑफिस में बैठकर नहीं, मिस्र में हुए गाजा शांति शिखर सम्मेलन को मौका बनाया गया. शहबाज ने यहां फिर ट्रंप को याद दिलाया कि पाकिस्तान ने आपको नोबेल शांति पुरस्कार के लिे नॉमिनेट किया था. यहां शहबाज ने फिर ट्रंप को भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का झूठा क्रेडिट दिया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ट्रंप के कसीदे ऐसे पढ़ रहे थे कि वहां मौजूद इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी भी मुंह पर हाथ रखकर सुनती रहीं, उनके चेहरे पर आश्चर्च भाव साफ दिख रहा था.
उन्होंने कहा, “आज का दिन समकालीन इतिहास के सबसे महान दिनों में से एक है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अथक प्रयासों के बाद शांति हासिल की गई है, जो वास्तव में शांति के व्यक्ति हैं [और] जिन्होंने इस दुनिया को शांति और समृद्धि के साथ रहने की जगह बनाने के लिए इन महीनों में दिन-रात लगातार काम किया है.”
मैं कहूंगा कि पाकिस्तान ने पहले भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकने और फिर अपनी अद्भुत टीम के साथ युद्धविराम हासिल करने में उनके उत्कृष्ट और असाधारण योगदान के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था. और आज फिर, मैं इस महान राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करना चाहूंगा क्योंकि मुझे वास्तव में लगता है कि वह शांति पुरस्कार के लिए सबसे सच्चे और सबसे अद्भुत उम्मीदवार हैं. उन्होंने न केवल दक्षिण एशिया में शांति लाई है, लाखों लोगों, उनके जीवन को बचाया है
ट्रंप इसपर खुश हो गए. पोडियम पर फिर से आते हुए ट्रंप ने चुटकी ली: “वाह! मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी. चलो घर चलते हैं, मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है. सभी को अलविदा.
